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आम आदमी पार्टी ya सपनो का एक हवामहल

Posted On: 16 Dec, 2014 Others,कविता,Politics में

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The best thing which can happen to a democracy is to have powerful opposition and the aggressive government. I don’t know where I will be fit in… I pray for the best of our country… and hope… that i am introspecting my self … and my party …
मैं बेजारियों का एक पुलिंदा बन न जाऊँ   …
कहीं मैं शाम का सूरज बनूँ  … और ढल न जाऊँ  …
मैं डरता हूँ  … मेरे वादों में फितरत आ न जाए  …
जिन्हें बेज़ा कहा है  … मैं उन्हीं में मिल न जाऊँ  ।
बड़ी बेचैनियों के साथ  … मैं भी जी रहा हूँ  …
अकेले हूँ मंगर रह रह के बातें कर रहा हूँ  …
ये सपनो कि दुकां  … मेरी सजी तो खूब लेकिन  …
जिन्हें सपने दिए हैं   … मैं उन्हीं को छल न जाऊँ  … ।
जिन्हें बेज़ा कहा है  … मैं उन्हीं में मिल न जाऊँ  ।The best thing which can happen to a democracy is to have powerful opposition and the aggressive government. I don’t know where I will be fit in… I pray for the best of our country… and hope… that i am introspecting my self … and my party …
मैं बेजारियों का एक पुलिंदा बन न जाऊँ   …
कहीं मैं शाम का सूरज बनूँ  … और ढल न जाऊँ  …
मैं डरता हूँ  … मेरे वादों में फितरत आ न जाए  …
जिन्हें बेज़ा कहा है  … मैं उन्हीं में मिल न जाऊँ  ।
बड़ी बेचैनियों के साथ  … मैं भी जी रहा हूँ  …
अकेले हूँ मंगर रह रह के बातें कर रहा हूँ  …
ये सपनो कि दुकां  … मेरी सजी तो खूब लेकिन  …
जिन्हें सपने दिए हैं   … मैं उन्हीं को छल न जाऊँ  … ।
जिन्हें बेज़ा कहा है  … मैं उन्हीं में मिल न जाऊँ  ।

The best thing which can happen to a democracy is to have powerful opposition and the aggressive government. I don’t know where I will be fit in… I pray for the best of our country… and hope… that i am introspecting my self … and my party …

मैं बेजारियों का एक पुलिंदा बन न जाऊँ   …

कहीं मैं शाम का सूरज बनूँ  … और ढल न जाऊँ  …

मैं डरता हूँ  … मेरे वादों में फितरत आ न जाए  …

जिन्हें बेज़ा कहा है  … मैं उन्हीं में मिल न जाऊँ  ।

बड़ी बेचैनियों के साथ  … मैं भी जी रहा हूँ  …

अकेले हूँ मंगर रह रह के बातें कर रहा हूँ  …

ये सपनो कि दुकां  … मेरी सजी तो खूब लेकिन  …

जिन्हें सपने दिए हैं   … मैं उन्हीं को छल न जाऊँ  … ।

जिन्हें बेज़ा कहा है  … मैं उन्हीं में मिल न जाऊँ  ।



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