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गरीबों का मसीहा हूँ ... ये कहना काफी आसाँ है ....

Posted On: 15 Dec, 2014 Others,social issues,कविता,Politics में

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तुम अगर साफ़गोई कि यहाँ पर बात करते हो ….

भला फिर वक़्त कि इन हरकतों से …. क्योँ ही डरते हो …


थपेड़े और भी आयेंगे …. यूँ तुम को गिराने को ….

कुल्हाड़ी और भी गहरी जड़ों को काट जाएंगी …

मगर ये सच नहीं है … तो उठो और सामने आओ …

ये आरोपों कि आंधी है … जरा लड़ के तो दिखलाओ …


गरीबों का मसीहा हूँ …. ये कहना काफी आसाँ है ….

बदलते वक़्त कि मैं ही दिशा हूँ … काफी आसाँ है …

मगर सैलाब में …. आंधी में खुद को थाम कर रखना …

अगर आता हो तुम को ये हुनर … तो ये भी बतलाओ …



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